F.i.g.h.t C.l.u.b

राष्ट्रकवी प्रदीप के बारे में मैंने ज्यादा पढ़ा नहीं है, लेकिन माँ पापा की वजह से बचपन में इनके काफी गीत सुनें. मैं इनको ‘रुलाने वाले अंकल’ कहता था क्यूंकि इनके गाने सुनते वक़्त मुझ पर काफी अलग तरह का प्रभाव पड़ता था और एक निराशा सी होती थी. आज कवी प्रदीप का जन्मदिन है. सोचा कुछ यादें ताज़ा कर लू क्यूंकि कल मेरे पापा का जन्मदिन है और इसी बहाने पापा से नम्बर भी कमा लूँगा और शायद आप में से कुछ लोग प्रदीप को भी सुन लें. कवी प्रदीप का असली नाम रामचंद्र नारायणजी दिवेदी था. उनकी आवाज़ में वो ही खनक थी जो हम पुराने कवियों की आवाज़ में सुनते आये हैं. उन्होंने कुछ ऐसे हिंदी गाने लिखे हैं, जो हमारे ज़हन में घर कर चुके हैं, मगर शायद हम जानते नहीं है की वो प्रदीप की रचनायें हैं. उनके कुछ मशहूर गाने हैं

चल चल रे…

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